baalakaanda-mangalaacharana-2
मुकः सुवाचको भवेत् पङ्गुस्तु रोहको नगे।
कलिमलविनाशेन तेन दय्यै दयालुना॥2॥
* मूक होइ बाचाल पंगु चढ़इ गिरिबर गहन।
जासु कृपाँ सो दयाल द्रवउ सकल कलिमल दहन॥2॥
मुकः सुवाचको भवेत् पङ्गुस्तु रोहको नगे।
कलिमलविनाशेन तेन दय्यै दयालुना॥2॥
* मूक होइ बाचाल पंगु चढ़इ गिरिबर गहन।
जासु कृपाँ सो दयाल द्रवउ सकल कलिमल दहन॥2॥
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